UP NEWS - मामूली मारपीट की घटना को राजनीतिक रंग देने की साजिश

AKASH DIWEDI :- एक विद्यालय की छात्रा से हुई छेड़छाड़ के मामले में छात्रों में हुई मारपीट के मामले को राजनैतिक रंग देने के लिए एक बार फिर सपा कार्यकर्ताओं का चेहरा बेनकाब हो गया। वहीं सपा कार्यकर्ता इस मामले को लेकर कोतवाली प्रभारी को हटाने के मंसूबे में एक बार फिर नाकाम साबित हुए।
बताते चलें कि विगत 4 दिन पूर्व एक छात्रा से छेड़छाड़ के मामले में छात्रों के बीच मारपीट हुई थी। इस घटना के दौरान कोतवाली प्रभारी राकेश कुमार सिंह  अवकाश पर चल रहे थे और कोतवाली का चार्ज उप निरीक्षक  सुर्खाब खान के हाथों में था।
मारपीट की इस घटना में पीड़ित की तहरीर पर आरोपी सभी छात्रों पर मारपीट का मुकदमा कोतवाली पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। वही छात्रा से हुई छेड़छाड़ के मामले को लेकर जब दूसरे पक्ष से कोतवाली पुलिस को तहरीर दी गई तो इस पर प्रथम पक्ष आग बबूला हो गया क्योंकि प्रथम पक्ष से समाजवादी पार्टी से राजनीतिक संबंध होने के चलते सपा कार्यकर्ता लामबंद हो गए और एक सोची-समझी रणनीति के तहत इस घटना को व्यापारियों का उत्पीड़न बता कर व्यापारियों का भी समर्थन हासिल किया गया और बाजार बंद का आवाहन कर महराजगंज बछरावां तिराहे पर सड़क जाम कर जमकर प्रदर्शन किया गया।
इस दौरान पूर्व सपा विधायक के पुत्र के नेतृत्व में सैकड़ों सपा कार्यकर्ता धरना प्रदर्शन में जुटे रहे और कोतवाली प्रभारी के हटाये जाने की मांग पर अड़े रहे। स्थिति नाजुक देख अपर पुलिस अधीक्षक शशि शेखर सिंह ने मामले में हस्तक्षेप किया और व्यापारियों को समझा बुझा कर मामले को शांत कराना चाहा लेकिन सपा नेताओं की हठधर्मिता के आगे मजबूर होकर अपर पुलिस अधीक्षक को झूठा आश्वासन देना पड़ा और किसी तरह भीड़ को समझा-बुझाकर सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को बहाल किया गया।
वहीं दूसरी ओर से पीड़ित छात्रा के परिजन भारतीय किसान यूनियन (भानु) के सदस्य होने के चलते भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं में भी सपा कार्यकर्ताओं के प्रति खासा आक्रोश व्याप्त हो गया और सैकड़ों की संख्या में भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने क्षेत्राधिकारी कार्यालय पहुंच कर कोतवाली प्रभारी राकेश सिंह के स्थानांतरण को रोके जाने तथा मामले की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की। 
जिसके बाद क्षेत्राधिकारी गोपीनाथ सोनी ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया जिसके बाद भारतीय किसान यूनियन का प्रदर्शन शांत हुआ। कस्बे में शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए कई थानों की पुलिस और पीएसी बल मौके पर मौजूद रहा और शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कस्बे की सड़कों पर देर शाम तक पुलिस का फ्लैग मार्च चलता रहा।

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