M.P.- नि:शुल्क स्वास्थ्य योजनाएँ साबित हो रहीं जीवनदायिनी

ROHIT SHARMA :- प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य की बेहतरी की ओर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिये संचालित योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी संजीदगी से किया जा रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट मानना है कि बच्चे स्वस्थ होंगे, तभी परिवार, देश और प्रदेश के उत्थान में बेहतर योगदान दे सकेंगे।
बैंगलुरु में हुई हेमंत की नि:शुल्क ह्रदय शल्य चिकित्सा : मण्डला जिले के##### हेमंत दुबे को वर्ष 2013 में जब बुखार के इलाज के दौरान जबलपुर में पता चला कि वह ह्रदय रोग से पीड़ित है, तो उसके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। हेमंत के पिता कहते हैं कि इतने बड़े इलाज के लिये पैसे की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। तभी मुख्यमंत्री बाल ह्रदय उपचार योजना में बैंगलुरु के नारायण ह्रदयालय में इलाज के लिये 2 लाख 85 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई। सफल ऑपरेशन के बाद हेमंत अब पूर्णत: स्वस्थ है।
#####मिन्टू के क्लब फुट का हुआ नि:शुल्क ऑपरेशन : बैतूल जिले के ग्राम चिखलीखुर्द की 8 वर्षीय मिन्टू दवंडे जन्म से ही बायलेटरल क्लब फुट (पैरों का टेढ़ापन) से पीड़ित थी। बीमारी के चलते मिन्टू न खड़ी हो पाती थी, न चल पाती थी। मिन्टू के पिता किसनू और माँ कौशल्या दवंडे के पास इतना पैसा नहीं था कि बेटी का इलाज करवा पाते। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के दल ने भ्रमण के दौरान मिन्टू को चिन्हित कर जिला शीघ्र हस्तक्षेप केन्द्र रेफर किया। भ्रांतियों के चलते पहले तो मिन्टू के माता-पिता ऑपरेशन करवाने के लिये तैयार नहीं हुए। दल ने लगातार उनकी काउंसिलिंग कर उन्हें राजी किया। तत्पश्चात् पाढर चिकित्सालय में 28 जून, 2018 को मिन्टू का नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ। मिन्टू अब न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है, बल्कि स्कूल भी जाने लगी है।
हरीश को मिली सुंदर मुस्कान : झाबुआ जिले के ग्राम कोकावद में कटे-फटे##### होंठ के साथ जन्में मासूम हरीश के पिता पैसे की कमी के कारण उसका इलाज नहीं करवा पा रहे थे। एक दिन आरबीएसके की टीम खुद उनके घर पहुँची और सब इंतजाम करवाया। स्माइल ट्रेन योजना में हरीश का ऑपरेशन इंदौर के सीएचएल अपोलो अस्पताल में सरकारी खर्च पर करवाया गया। हरीश के माता-पिता के आने-जाने का खर्च भी सरकार ने ही उठाया।
#####संबल योजना में हुआ हम्माल गोविंद के ह्रदय रोग का इलाज : धार जिले के ग्राम बरमंडल के गोविंद हम्माली और तुलावटी का काम करते हैं। वह संबल योजना में असंगठित श्रमिक के रूप में पंजीकृत भी है। इन्हे ह्रदय रोग ने जकड़ लिया था। राज्य बीमारी सहायता निधि में 97 हजार रुपये की सहायता से इंदौर के निजी अस्पताल में एक जून, 2018 को इनकी एंजियोप्लास्टी सर्जरी करवाई गई। गोविन्द को नया जीवन मिलने से उसका पूरा परिवार खुश है।

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